19,300 रुपये निकालने के लिए नियमों में उलझा आदिवासी युवक; व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

ओडिशा।
ओडिशा से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गरीब आदिवासी युवक जीतू मुंडा अपनी बहन कालरा मुंडा के बैंक खाते से 19,300 रुपये निकालना चाहता था, लेकिन बैंक की औपचारिकताओं के चलते उसे पैसे नहीं मिल पाए।
बताया जा रहा है कि बैंक अधिकारियों ने युवक से कहा कि रकम निकालने के लिए खाताधारक को साथ लाना होगा या फिर डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी वारिस होने का प्रमाण देना होगा। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के चलते युवक ये दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं करा सका।
मजबूरी में उठाया खौफनाक कदम
परिवार की हालत बेहद खराब होने के कारण युवक के पास कोई रास्ता नहीं बचा। आरोप है कि इसी मजबूरी में उसने अपनी बहन की कब्र खोदी, उसके कंकाल को बोरी में रखा और करीब 5 किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर बैंक पहुंच गया, ताकि अधिकारियों को यकीन दिला सके कि उसकी बहन अब जीवित नहीं है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना सामने आने के बाद बैंकिंग प्रक्रिया और ग्रामीण इलाकों में लोगों की परेशानियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। क्या गरीब और अशिक्षित लोगों के लिए सरकारी प्रक्रियाएं इतनी जटिल होनी चाहिए? क्या मानवीय आधार पर ऐसे मामलों में राहत नहीं दी जानी चाहिए?
हालांकि, इस मामले में बैंक की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह घटना न सिर्फ एक व्यक्ति की मजबूरी को दिखाती है, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।
