ईमेल में असहमति जताने के बाद कार्रवाई का दावा, VC–प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल; वरिष्ठ प्रोफेसर से भी पूछताछ

अजमेर, राजस्थान। Central University of Rajasthan में डॉ. B. R. Ambedkar जयंती समारोह को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर Dr. Rakesh Kumar ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम का विरोध करने के बाद उन्हें पुलिस द्वारा उनके कार्यालय से उठाकर करीब चार घंटे तक हिरासत में रखा गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
विवाद की शुरुआत SC/ST सेल द्वारा भेजे गए एक ईमेल से हुई, जिसमें 15 अप्रैल 2026 को अंबेडकर जयंती समारोह आयोजित करने की सूचना दी गई थी। ईमेल में SC/ST वर्ग के शिक्षकों से कहा गया था कि वे SC/ST वर्ग के छात्रों को कार्यक्रम में लाएं, उनकी अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करें और कम से कम पांच छात्रों के नाम उपलब्ध कराएं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. राकेश कुमार ने कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अंबेडकर जयंती 14 अप्रैल को मनाई जाती है, ऐसे में 15 अप्रैल को कार्यक्रम आयोजित करना गलत है। उन्होंने छात्रों के नाम देने की प्रक्रिया को भी अनुचित बताया और इसे दबाव बनाने जैसा बताया।
उन्होंने अपने ईमेल में स्पष्ट लिखा – “मैं किसी भीड़ का हिस्सा नहीं बन सकता, खासकर जब वह राजनीतिक प्रकृति की हो।”
“ऑफिस से उठाकर 4 घंटे तक रोके रखा गया”
डॉ. कुमार का आरोप है कि 15 अप्रैल को पुलिस उनके कार्यालय में पहुंची और बिना किसी लिखित आदेश या स्पष्ट कारण के उन्हें अपने साथ ले गई।
उनके अनुसार:
- उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया
- उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया
- और उन्हें करीब चार घंटे तक विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन में रोके रखा गया
उन्होंने इस कार्रवाई को अपनी आवाज दबाने की कोशिश बताया है।
VC और पुलिस पर साजिश का आरोप
प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनका ईमेल सीमित लोगों को भेजा गया था, इसके बावजूद वह पुलिस तक पहुंच गया, जो अपने आप में सवाल खड़ा करता है।
उनका यह भी कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उन पर कार्यक्रम में बाधा डालने की साजिश का आरोप लगाया गया, जबकि उन्होंने केवल अपनी असहमति व्यक्त की थी।
SC/ST सेल की भूमिका पर सवाल
डॉ. कुमार ने SC/ST सेल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले SC/ST छात्राओं के उत्पीड़न के मामलों में सेल ने सक्रियता नहीं दिखाई, लेकिन इस कार्यक्रम को लेकर शिक्षकों और छात्रों पर दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने अपने ईमेल में यह भी लिखा था कि “SC/ST समुदाय बिकाऊ नहीं है” और उसे राजनीतिक भीड़ के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ प्रोफेसर से भी पूछताछ

विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर Dr. S. N. Nagendra Ambedkar Sole ने बातचीत में बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उनसे भी विस्तार से पूछताछ की गई। उन्होंने संकेत दिया कि उनसे कई पहलुओं पर जानकारी ली गई, जिसमें संबंधित घटनाओं और परिस्थितियों को लेकर विस्तृत चर्चा शामिल रही। इस दौरान अन्य कई प्रोफेसरों से भी पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है। साथ ही, कुछ अन्य प्रोफेसरों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नाराज़गी व्यक्त की है। यह घटनाक्रम इस ओर इशारा करता है कि मामला केवल एक ईमेल विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके बाद कई स्तरों पर गतिविधियां हुईं।
प्रोफेसर की मांग
डॉ. कुमार ने मांग की है कि:
- यदि उनके खिलाफ कोई शिकायत या FIR दर्ज है, तो उसकी प्रति उपलब्ध कराई जाए
- इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
- कार्रवाई में शामिल अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
प्रशासन की चुप्पी
इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बड़ा सवाल
यह मामला विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रशासनिक दबाव और सामाजिक-राजनीतिक कार्यक्रमों की प्रकृति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या असहमति जताना अब जोखिम भरा हो गया है? और क्या शिक्षकों व छात्रों को ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए बाध्य किया जा सकता है?
अंबेडकर जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर के बीच उठे ये सवाल अब अकादमिक और सामाजिक दायरे में व्यापक चर्चा का विषय बन गए हैं।
