गिरल माइंस मजदूर आंदोलन: भाटी के समर्थन से गरमाई सियासत, कलेक्ट्रेट पर तनाव के बीच टला बड़ा हादसा

बाड़मेर मजदूर आंदोलन हुआ उग्र

बाड़मेर/गिरल: बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में चल रहा मजदूर आंदोलन अब राजस्थान की बड़ी राजनीतिक और श्रमिक बहस बन चुका है। यह आंदोलन स्थानीय युवाओं को रोजगार, श्रमिक अधिकारों और कामकाजी सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन शिव विधायक Ravindra Singh Bhati के जुड़ने के बाद यह राज्यस्तरीय मुद्दा बन गया।

जानकारी के अनुसार, गिरल माइंस क्षेत्र में स्थानीय मजदूरों, युवाओं और ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से रोजगार में स्थानीय युवाओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी जा रही। साथ ही हटाए गए श्रमिकों की पुनर्बहाली, 8 घंटे की शिफ्ट, बोनस एक्ट के तहत भुगतान और श्रमिकों के लिए बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन तेज हुआ। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई बार ज्ञापन और वार्ता के प्रयासों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।

आंदोलन ने बड़ा मोड़ तब लिया जब रविंद्र सिंह भाटी मजदूरों के समर्थन में धरना स्थल पहुंचे और खुलकर साथ दिया। उनके जुड़ने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और समर्थक आंदोलन से जुड़ गए। भाटी लगातार इसे स्थानीय रोजगार, श्रमिक सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बताते रहे।

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब प्रदर्शनकारी गिरल क्षेत्र से बाड़मेर कलेक्ट्रेट पहुंचे। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग कर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसी दौरान तनाव बढ़ा और रविंद्र सिंह भाटी ने कथित रूप से अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और सुरक्षा अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

बाड़मेर मजदूर आंदोलन हुआ उग्र विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने छिड़का अपने पर पेट्रोल

कलेक्ट्रेट पर तनावपूर्ण माहौल के बीच पुलिस प्रशासन की भूमिका भी अहम रही। मौके पर तैनात अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित किया और हालात को बिगड़ने नहीं दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एडीशनल एसपी बाड़मेर नितीश आर्य की त्वरित प्रतिक्रिया और सूझबूझ से स्थिति को संभालने में मदद मिली और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई।
इस घटना के बाद राजस्थान की राजनीति भी गरमा गई। Ashok Gehlot ने सरकार की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर सवाल उठाए। वहीं Tikaram Jully ने भी मजदूरों के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि समय पर समाधान निकाला जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं बनती। विपक्ष ने इसे श्रमिकों की अनदेखी और प्रशासनिक विफलता से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा।

आज सुबह भाटी की ओर से भी आंदोलन को लेकर सख्त रुख सामने आया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मजदूरों का धरना नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार, हक और सम्मान की लड़ाई है। समर्थकों ने भी साफ किया कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

फिलहाल प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी है और मजदूरों की मांगों को लेकर बातचीत की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि गिरल माइंस मजदूर आंदोलन का समाधान किस दिशा में निकलता है और सरकार आगे क्या कदम उठाती है।

Munder News | Fact-Based Report

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