अजमेर। शहर के गुलाबबाड़ी क्षेत्र निवासी विकास टांक ने केंद्रीय विश्वविद्यालय, गुजरात के सामाजिक प्रबंधन विभाग से पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर अजमेर सहित पूरे क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। विकास टांक, श्री दयाल सिंह टांक के सुपुत्र हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, मित्रों और स्थानीय लोगों में हर्ष का माहौल है।

डॉ. विकास टांक का शोध विषय “उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत ग्रामीण भारत के विकास में उच्च शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका – राजस्थान के चयनित शैक्षणिक संस्थानों का अध्ययन” रहा। इस शोध में उन्होंने यह विश्लेषण किया कि किस प्रकार उच्च शिक्षण संस्थान ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकते हैं और सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी बना सकते हैं।
अपने शोध कार्य में डॉ. टांक ने राजस्थान के चयनित शैक्षणिक संस्थानों का अध्ययन करते हुए पाया कि यदि विश्वविद्यालय और कॉलेज गांवों के साथ सीधे जुड़कर कार्य करें, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कृषि, कौशल विकास और सामाजिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थागत सहभागिता से ग्रामीण समुदाय में आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन को गति मिलती है।
यह शोध केंद्रीय विश्वविद्यालय, गुजरात में प्रोफेसर डॉ. तुलजा भवानी एवं डॉ. मनोज कुमार वनारा के मार्गदर्शन में पूर्ण हुआ। डॉ. विकास ने इससे पूर्व अजमेर जिले में स्थित राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की थी।
वर्तमान में डॉ. विकास टांक अहमदाबाद स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें एक समर्पित शिक्षाविद् के रूप में स्थापित करती है।
उन्नत भारत अभियान (UBA) : ग्रामीण विकास की सशक्त पहल
उन्नत भारत अभियान भारत सरकार द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश के गांवों का समग्र और सतत विकास सुनिश्चित करना है। इस योजना के अंतर्गत देश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों – जैसे विश्वविद्यालय, आईआईटी, एनआईटी और अन्य कॉलेजों – को गांवों से जोड़ा जाता है।
UBA के माध्यम से संस्थानों के विद्यार्थी और शिक्षक गांवों को गोद लेकर वहां की समस्याओं का अध्ययन करते हैं और उनके व्यावहारिक समाधान तैयार करते हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करना है।
मुख्य विशेषताएं:
- गांवों में तकनीकी और सामाजिक समाधान लागू करना
- शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और कृषि में सुधार लाना
- स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना
- ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान करना
- समाज और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना
डॉ. विकास टांक का शोध उन्नत भारत अभियान के प्रभाव और संभावनाओं को उजागर करता है। उनका कार्य यह दर्शाता है कि यदि शैक्षणिक संस्थान सक्रिय भूमिका निभाएं, तो ग्रामीण भारत के विकास को नई दिशा दी जा सकती है।
डॉ. विकास टांक की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम और समर्पण का परिणाम है, बल्कि यह युवाओं के लिए भी प्रेरणा है कि वे शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
