चार घंटे तक हिरासत में रखने, मोबाइल छीनने, धमकी देने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दबाने के आरोप; विश्वविद्यालय प्रशासन और PRO की चुप्पी पर भी उठे सवाल
अजमेर | एक्सक्लूसिव फॉलो-अप रिपोर्ट
Reported by: Munder News Desk
Published: May 2026
केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान (CURAJ) में अंबेडकर जयंती कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े संस्थागत और प्रशासनिक सवाल में बदलता दिखाई दे रहा है।
विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार ने पुलिस की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को “अपूर्ण, भ्रामक और पक्षपातपूर्ण” बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन, कुलपति प्रो. आनंद भालेराव, रजिस्ट्रार अमरदीप शर्मा और स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

“सच्चाई सामने आनी चाहिए। मुझे अपमानित किया गया, चार घंटे तक हिरासत में रखा गया और मेरी आवाज दबाने की कोशिश हुई।”
डॉ. राकेश कुमार ने विस्तृत लिखित जवाब में दावा किया है कि पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने मिलकर dissenting voices को दबाने का प्रयास किया।
केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान (CURAJ), अजमेर
क्या है पूरा विवाद?
15 अप्रैल 2026 को CURAJ में आयोजित अंबेडकर जयंती कार्यक्रम से पहले कुछ SC/ST फैकल्टी सदस्यों ने कार्यक्रम की प्रकृति और प्रशासन के रवैये को लेकर सवाल उठाए थे।
डॉ. राकेश कुमार के अनुसार, उन्होंने एक ईमेल के जरिए कार्यक्रम में भाग न लेने और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा SC/ST समुदाय से जुड़े मुद्दों की अनदेखी किए जाने पर अपनी आपत्तियाँ दर्ज करवाई थीं।
उनके अनुसार, इसी ईमेल को बाद में “कानून-व्यवस्था के खतरे” के रूप में प्रस्तुत किया गया।
“The SC/ST community is not for sale.”
डॉ. कुमार के अनुसार, यह पंक्ति उनके ईमेल का हिस्सा थी जिसमें उन्होंने प्रशासन पर SC/ST समुदाय के मुद्दों की उपेक्षा का आरोप लगाया था।
“मुझे 4 घंटे तक हिरासत में रखा गया”
डॉ. राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके कार्यालय पहुंची, मोबाइल फोन छीन लिया गया और उन्हें छात्रों व स्टाफ के सामने जबरन बाहर ले जाया गया।
उनका दावा है कि पुलिस ने उन्हें लगभग चार घंटे तक विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन के पास एक कमरे में रखा।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें FIR या शिकायत की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई।
“अगर मैंने कोई अपराध नहीं किया, तो मुझे हिरासत में क्यों रखा गया?”
मामले को लेकर पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
डॉ. कुमार ने आरोप लगाया कि इंस्पेक्टर दयाराम चौधरी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, जेल भेजने की धमकी दी और उनके कार्यालय से जबरन बाहर निकाला।
पुलिस रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल
डॉ. कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि जिस ASI ने रिपोर्ट तैयार की, वह उसी थाने में कार्यरत है जहाँ इंस्पेक्टर दयाराम चौधरी प्रभारी हैं।
उनका कहना है कि इससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने उच्च अधिकारियों से कॉल रिकॉर्ड, ईमेल एक्सचेंज और CCTV फुटेज की जांच कराने की मांग की है।
VC और प्रशासन पर क्या आरोप?
डॉ. राकेश कुमार ने कुलपति प्रो. आनंद भालेराव और रजिस्ट्रार अमरदीप शर्मा पर आरोप लगाया कि उन्होंने SC/ST फैकल्टी सदस्यों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया।
उन्होंने दावा किया कि dissenting voices को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया गया।
डॉ. कुमार के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके ईमेल को गलत तरीके से पेश कर “सुरक्षा खतरे” का रूप दिया।
विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर उठते सवाल
PRO अनुराधा मित्तल की चुप्पी पर भी सवाल
मामले में विश्वविद्यालय की जनसंपर्क अधिकारी (PRO) अनुराधा मित्तल की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
मीडिया संस्थानों और पत्रकारों द्वारा लगातार संपर्क किए जाने के बावजूद अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सूत्रों के अनुसार, कई पत्रकारों ने PRO कार्यालय से जवाब लेने की कोशिश की, लेकिन कोई स्पष्ट पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया।
“इतने गंभीर आरोपों के बीच प्रशासन की चुप्पी सवालों को और गहरा कर रही है।”
मीडिया जगत में यह सवाल उठ रहा है कि जब मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है, तब विश्वविद्यालय प्रशासन सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखने से क्यों बच रहा है।
निष्पक्ष जांच की मांग
डॉ. राकेश कुमार ने मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और ईमेल एक्सचेंज की निष्पक्ष जांच हो, तो “सच्चाई सामने आ जाएगी”।
उन्होंने यह भी कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों में असहमतिको अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों, लिखित जवाब, पुलिस रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित है। विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।
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इस मामले से जुड़ी हमारी पिछली रिपोर्ट पढ़ें: CURAJ अंबेडकर जयंती विवाद की पहली रिपोर्ट
