रोडवेज कर्मचारियों का सरकार को अल्टीमेटम: 27 अप्रैल से आमरण अनशन, हड़ताल की चेतावनी

जयपुर | Sharvan Kumar

Roadways Protest Jaipur, Munder News

राजस्थान में परिवहन सेवाओं को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। राजस्थान परिवहन निगम के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है।

राजस्थान परिवहन निगम संयुक्त कर्मचारी फेडरेशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो 27 अप्रैल 2026 से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा, जिसके बाद राज्यव्यापी हड़ताल की भी संभावना है।

📅 चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान

फेडरेशन के प्रदेश महामंत्री सत्यनारायण सैनी के अनुसार –

  • 20 अप्रैल से 26 अप्रैल 2026 तक क्रमिक अनशन किया जाएगा
  • मांगें नहीं मानी गईं तो 27 अप्रैल से आमरण अनशन शुरू होगा
  • इसके बाद आंदोलन को और उग्र करते हुए राज्यव्यापी हड़ताल की जाएगी

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने पहले भी कई बार ज्ञापन और वार्ताओं के जरिए समाधान की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

📌 कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

  • कर्मचारियों के साथ हो रहे श्रम शोषण पर रोक लगाई जाए
  • फर्जी डिग्री के आधार पर हुई नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच हो
  • चालकों को पदोन्नति (प्रमोशन) दी जाए
  • करीब 13,000 रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए
  • संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए
  • पिछले 5 महीनों से रुके वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए
  • 18–20 घंटे की ड्यूटी कम कर साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित किया जाए
  • सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन में बढ़ोतरी की जाए
  • सातवें वेतनमान का लाभ लागू किया जाए

⚠️ सेवाओं पर असर की आशंका

फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। इससे प्रदेशभर में रोडवेज बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

ऐसी स्थिति में आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में, जहां परिवहन का मुख्य साधन रोडवेज बसें ही हैं।

🧾 बैकग्राउंड

  • कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं
  • कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन समाधान नहीं निकला
  • वेतन, भर्ती और कार्यभार जैसे मुद्दों पर कर्मचारियों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है

🟡 निष्कर्ष

राजस्थान रोडवेज कर्मचारियों का यह आंदोलन आने वाले दिनों में बड़ा रूप ले सकता है। यदि सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच जल्द सहमति नहीं बनती, तो इसका असर राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और आम जनजीवन पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।

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